Mahashivratri 2024: इस साल कब है महाशिवरात्रि? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

By Deepak Chaurasiya

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Mahashivratri 2024: इस साल कब है महाशिवरात्रि? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Maha Shivratri 2024

Maha Shivratri Kab Hai Date: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि पर्व का बड़ा महत्व है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। धर्मशास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। वहीं ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को भोलेनाथ दिव्य ज्योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। शिवपुराण में उल्लेखित एक कथा के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था और भोलेनाथ ने वैराग्य जीवन त्याग कर गृहस्थ जीवन अपनाया था। इस दिन विधिवत आदिदेव महादेव की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है व कर्षों का निवारण होता है।

Table of contents:-

  • Maha Shivratri Kab Hai Date
  • महाशिवरात्रि 2024 तिथि
  • महाशिवरात्रि 2024 पूजा मुहूर्त
  • महाशिवरात्रि 2024 चार प्रहर मुहूर्त
  • महा शिवरात्रि का महत्व
  • महा शिवरात्रि मनाना
  • महाशिवरात्रि पूजा-विधि
  • महाशिवरात्रि पूजा सामग्री लिस्ट

महाशिवरात्रि 2024 तिथि

पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 8 मार्च को संध्याकाल 09 बजकर 57 मिनट पर होगी। इसका समापन अगले दिन 09 मार्च को संध्याकाल 06 बजकर 17 मिनट पर होगा। शिव जी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए उदया तिथि देखना जरूर नहीं होता है। ऐसे में इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 8 मार्च 2024 को रखा जाएगा।

महाशिवरात्रि 2024 पूजा मुहूर्त

8 मार्च को महाशिवरात्रि के दिन शिव जी की पूजा का समय शाम के समय 06 बजकर 25 मिनट से 09 बजकर 28 मिनट तक है। इसके अलावा चार प्रहर का मुहूर्त इस प्रकार है।

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Maha Shivratri 2024

महाशिवरात्रि 2024 चार प्रहर मुहूर्त

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय शाम 06 बजकर 25 मिनट से रात 09 बजकर 28 मिनट तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय रात 09 बजकर 28 मिनट से 9 मार्च को रात 12 बजकर 31 मिनट तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय रात 12 बजकर 31 मिनट से प्रातः 03 बजकर 34 मिनट तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय प्रातः 03:34 से प्रातः 06:37

निशिता काल मुहूर्त रात में 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक (9 मार्च 2024)

व्रत पारण समय सुबह 06 बजकर 37 मिनट से दोपहर 03 बजकर 28 मिनट तक (9 मार्च 2024)

महा शिवरात्रि का महत्व:

  • भगवान शिव का जश्न मनाना: यह रात शिव और शक्ति के अभिसरण का प्रतीक है, जो चेतना और ऊर्जा के मिलन का प्रतिनिधित्व करती है। भक्त भगवान शिव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, आध्यात्मिक विकास, अज्ञानता पर काबू पाने और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
  • शिव और पार्वती का विवाह: किंवदंतियों के अनुसार, महा शिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य विवाह का जश्न मनाती है।
  • अंधेरे पर काबू पाना: प्रतीकात्मक रूप से, रात हमारे भीतर अज्ञानता और नकारात्मकता के अंधेरे पर काबू पाने का प्रतीक है।
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महा शिवरात्रि मनाना:

  • शिवरात्रि व्रतम से एक दिन पहले, आमतौर पर त्रयोदशी पर, भक्तों को केवल एक बार भोजन करना चाहिए।
  • शिवरात्रि के दिन, सुबह की अनुष्ठान पूरी करने के बाद, भक्तों को पूरे दिन का उपवास रखने और अगले दिन भोजन करने का संकल्प लेना चाहिए।
  • इस प्रतिज्ञा (संकल्प) के दौरान, भक्त पूरे उपवास अवधि के दौरान आत्मनिर्णय के लिए प्रतिबद्ध होते हैं और सफल समापन के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद मांगते हैं।
  • हिंदू व्रत सख्त होते हैं और लोग उन्हें सफलतापूर्वक समाप्त करने के लिए शुरू करने से पहले भगवान का आशीर्वाद मांगते हैं।
  • शिवरात्रि के दिन, भक्तों को शिव पूजा करने या मंदिर में जाने से पहले शाम को दूसरा स्नान करना चाहिए।
  • शिव पूजा रात के दौरान की जानी चाहिए और भक्तों को अगले दिन स्नान के बाद अपना उपवास तोड़ना चाहिए।
  • अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए भक्तों को सूर्योदय के बीच और चतुर्दशी तिथि (चौदहवें चंद्र दिवस) के अंत से पहले अपना उपवास तोड़ना चाहिए।
  • कुछ का मानना ​​है कि चतुर्दशी तिथि समाप्त होने के बाद ही व्रत तोड़ना चाहिए, जबकि अन्य का मानना ​​है कि शिव पूजा और व्रत तोड़ना दोनों चतुर्दशी तिथि के भीतर ही होना चाहिए।
  • शिवरात्रि पूजा रात के दौरान एक या चार बार की जा सकती है, जो लोग चार बार शिव पूजा करते हैं उनके लिए रात को चार भागों में विभाजित किया जाता है जिसे प्रहर कहा जाता है।

महाशिवरात्रि पूजा-विधि

शिवरात्रि के दिन स्नानादि से निवृत्त व्रत का संकल्प करें। व्रत व्रत किसी भी शिव मंदिर या अपने घर में नर्मदेश्वर की मूर्ति या पौराणिक लिंग का निर्माण कर संपूर्ण पूजन सामग्री एकत्रित कर आसन पर अर्पित कर सकते हैं ‘मम इह जन्मनि जन्मांतरेवार्जित सकल पाप क्षयार्थं आयु- आरोग्य-ऐश्वर्य-पुत्र-पौत्रादि सकल कामना सिद्धि डेक अंते शिवसायुज्य प्राप्तये शिवरात्रिव्रत सङ्गता सिध्यार्थं साम्बसदाशिव पूजनम् करिष्ये। मंत्र जप करते हैं स्थापित शिवमूर्ति की षोडशोपचार पूजा करें। अक, कनेर, विल्वपत्र और धतूरा, कटली आदि। रुद्रीपाठ, शिवपुराण, शिवमहिम्नस्तोत्र, शिव संबंधी अन्य धार्मिक कथाएँ। रुद्राभिषेक करा, तो अत्यंत उत्तम है। रात्रि जागरण कर दूसरे दिन प्रातःकाल शिवपूजा के बाद जौ, तिल और खेड से 108 आहुति ‘त्र्यम्बकं यजामहे या ‘ऊं नमः शिवाय आदि मंत्रों से यज्ञशाला में दें। ब्राह्मणों या शिवभक्तों को स्वयं भोजन कर व्रत का पारण करना चाहिए।

महाशिवरात्रि पूजा सामग्री लिस्ट

पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि।

आज के इस लेख में आपको Mahashivratri 2024 के बारे में जानकारी दी गई। हम आशा करते हैं इस लेख को पढ़कर आपको इस एजुकेशन से जुड़े सभी जानकारी मिल गए होंगे। अगर ये लेख आपको पसन्द आया तो इसको सोशल मीडिया पर शेयर ज़रूर करिएगा। ताकि और लोगों को भी इसकी जानकारी हो पाए। और इसी तरह एजुकेशन, के ख़बरों को पढ़ने के लिए। Deepakkfantasy.com से जुड़े रहिए।

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