उत्‍तर भारत में लगे भूकंप के झटके, गोरखपुर, लखनऊ, नोएडा में हड़कंप, घरों से बाहर निकले लोग

By Deepak Chaurasiya

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दिल्ली-एनसीआर में देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. दिल्ली के साथ यूपी-बिहार में भी भूकंप आया है. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गई है -एनसीआर में देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. दिल्ली के साथ यूपी-बिहार में भी भूकंप आया है. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गई है….

केंद्र नेपाल में बताया जा रहा है। यह जमीन की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। इसकी तीव्रता 6.4 बताई जा रही है। फिलहाल यूपी में जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

गाजियाबाद में घरों से बाहर निकले लोग
गाजियाबाद में घरों से बाहर निकले लोग

भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग नींद से जागकर अपने घरों से बाहर आ गए। जो लोग कार चला रहे थे वे भी कारों से निकल कर बाहर आ गए।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि 6.4 तीव्रता का भूकंप आया जिसका केंद्र नेपाल था। हालांकि झटके राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में भी महसूस किए गए। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ ही हरियाणा के कई हिस्सों में भी धरती हिली। राष्ट्रीय भूकंप बजिन केंद्र के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रक्टिर स्केल पर 6.4 मापी गयी।

भूकंप के तेज झटके महसूस हुए
भूकंप के तेज झटके महसूस हुए

भूकंप जानें रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता के हिसाब से क्या हो सकता है असर:

  • 0 से 1.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है.
  • -2 से 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है.
  • – 3 से 3.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर होता है.
  • – 4 से 4.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं. दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं..
  • 15 से 5.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर फर्नीचर हिल सकता है।

क्यों आता है भूकंप

दरअसल,  हमारी धरती मुख्य रूप से चार परतों से बनी हुई है, जिन्‍हें इनर कोर, आउटर कोर, मैन्‍टल और क्रस्ट कहा जाता है। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहा जता है। ये 50 किलोमीटर की मोटी परतें होती हैं, जिन्हें टैक्‍टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैक्‍टोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं, घूमती रहती हैं, खिसकती रहती हैं। ये प्‍लेट्स अमूमन हर साल करीब 4-5 मिमी तक अपने स्थान से खिसक जाती हैं। ये क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर , दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इस क्रम में कभी कोई प्लेट दूसरी प्लेट के निकट जाती है तो कोई दूर हो जाती है। इस दौरान कभी-कभी ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। ऐसे में ही भूकंप आता है और धरती हिल जाती है। ये प्लेटें सतह से करीब 30-50 किमी तक नीचे हैं।

भूकंप के तेज झटके महसूस हुए
भूकंप के तेज झटके महसूस हुए

कैसे करें बचाव?

अगर अचानक भूकंप आ जाए तो घर से बाहर खुले में निकल जाएं। यदि आप घर में फंस गए हों तो बेड या मजबूत टेबल के नीचे छिप जाएं। घर के कोनों में खड़े होकर भी खुद को बचा सकते हैं। भूकंप आने पर लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें। खुले स्थान में जाएं, पेड़ व बिजली की लाइनों से दूर रहें। इसके अलावे भूकंप रोधी मकान भी उतने ही जरूरी होते हैं। यह हालांकि बहुत महंगा नहीं होता, पर इसे लेकर लोगों में जागरूकता की कमी के कारण अक्‍सर लोग इसकी अनदेखी कर बैठते हैं।

बड़े नुकसान की आशंका

रिक्टर स्केल पर भूकंप की 6.4 तीव्रता होने से बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है. मौसम विभाग और जलवायु परिवर्तन के उपाध्यक्ष महेश पलावत के मुताबिक भूकंप की तीव्रता बहुत अधिक थी, यह जीवन और संपत्ति को बड़े पैमाने में नष्ट करने में सक्षम है. वह कहते हैं कि इस तरह के भूकंप के बाद के हालात बहुत ही भयावह होते हैं. हालांकि दिल्ली या उत्तर पश्चिम इससे सुरक्षित हैं.

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